इस्लाम मे पाकी और नापाकी का बड़ा महत्व है अगर आप पाक नही तो न नमाज़ पढ़ सकते है ना क़ुरान पाकी हालांकि दो तरह की होती है एक जिस्म की जो किसी गन्दगी लगने से होती है तब ग़ुस्ल करके जिस्म को पाक किया जाता है दूसरी मन और ईमान की झूट चोरी गलत काम किसी को तकलीफ न देना अच्छे काम करके और बुराई से बचके ईमान को पाक किया जाता है
ग़ुस्ल से जुड़े कुछ सवाल और गलत फहमियां जिनके जबाव हम नीचे दे रहे है
ग़ुस्ल कब फर्ज होता है
ग़ुस्ल जब आपकी मनि (वीर्य) निकल जाए यानी अपने अपनी वाइफ के साथ हमबिस्तरी की हो या नाइट फैल हो जाये या अपने हसमेथुन किया हो इन सब चीज़ से ग़ुस्ल फ़र्ज़ हो जाता है बाकी किसी और चीज़ से नही ।
ग़ुस्ल से जुड़ी गलत फहमियां
जैसा कि आज कल इल्म न होने के कारण और दींन से दूर होने के कारण लोगो को मालूम नही सही क्या है और गलत क्या इस लिए आजकल कुछ भी सुनकर लोग उसपर अमल करना सुरु कर देते है चाहे गलत हो या सही और आजके दौर में हर कोई मुफ़्ती बना है हर कोई अपनी राय दे देता है के इस तरह ग़ुस्ल करे उस तरह करे हालांकि ग़ुस्ल बहुत आसान है
किन चीजों से ग़ुस्ल फर्ज नही होता
ग़ुस्ल पेसाब करने लैट्रीन करने उल्टी आने और अगर कुछ खयाल मन मे आ जाये और लुब्रिकेंट निकल जाए जो कि लार की तरह होता है पेशाब से आये मानी न निकले तो इन सबसे ग़ुस्ल फर्ज नही होता
ग़ुस्ल करने का सही तरीका और सुन्नत तरीका
लोग बाग कहते है और कुछ मौलाना तकरीर भी करते है के सही तरीके से ग़ुस्ल न किया तो समंदर में भी नहा लो ग़ुस्ल नही होगा नार्मल नहाने से भी ग़ुस्ल हो जाता है हालांकि सही तरीका सुन्नत तरीके से करे ग़ुस्ल पाक साफ जगह होना और जिस बर्तन से नहाये वो पाक होना दोनो हाथो को सबसे पहले गट्टों तक धो ले उसके बाद कमर के हिस्सा जहा गंदगी लगी हो शर्मगाह बगैरह को धो ले उसके बाद पूरा वजू करे फिर अगर चाहे तो ये सुन्नत है करे या न करे इसका सबाब है सीधे कंधे पर पानी बहाये फिर उल्टे पर फिर सर से पूरे बदन पर और हर जगह अच्छी तरह धो ले कही गंदगी न रह जाये बस ग़ुस्ल हो गया बहुत आसान है ये तरीका।
AURAT KE GUSAL KA TAREEKA
औरत और मर्द के ग़ुस्ल के तरीके में फर्क
औरत और मर्द के ग़ुस्ल के तरीके में कोई फर्क नही बस एक हदीस में एक बात मिलती है जब एक औरत अम्मा आयशा र अ के पास आई तो उन्होंने शर्मगाह की जगह कोई खुशबू दार चीज लगाने को कहा और सर के बालो में अच्छे से उंगली डाल कर जड़ो तक पानी को पहुचाये यानी गीला करे बाकी जैसे मर्द का तरीका है बेसे ही औरत का तरीका है कोई फर्क नही
शर्मगाह के बाल को औरत उस्तरे या ब्लेड से साफ कर सकती है और मर्द किस चीज से करे
इस्लाम एक आसान मजहब है और सच्चा मजहब है और ब्लेड रेजर या उस्तरे से बिल्कुल साफ कर सकती है शर्मगाह के बाल इसी तरह मर्द भी कर सकता है इसमें कोई हराम या हलाल बाली बात नही जैसा कि कुछ लोग इसे हराम या मुकरु कहते है
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